राम, रहीम, यशु, गुरु नानक
आपस में कर रहें थे बात
कोशिश में वो लगे थे की
जाने कुछ भारत के हालात्
दिखा उन्हें कुछ साफ़ नहीं
क्या अजब सा खेला था
मुरझाये चेहरों के बीच लगा
आज ख़ुशी का मेला था
नाम की जय सब करते
नाम का मर्म कोई जाने ना
सोने में समेटे इश्वर को
खुद में छुपा ये माने ना
एक बन्दा आ पहुंचा वहां
और आके ये गुहार लगाई
हर लो दुःख मेरे प्रभु जी
जीवन मेरा भया दुखदायी
राम देखे रहीम की ओर
नानक के समझ न आया
यशु भी थे असमंजस में
मेरे प्रभु कहके किसे बुलाया
एक ही खुशबु एक ही रंगत
एक फूल को हम पंखुडियां
आपस में कोई भेद दिखे न
इसने कैसे भेद जताया
नानक के चरणों में गिरा
मुख से जय राम उचारा
नानक बोले में नानक हूँ
क्या तुमने था मुझे पुकारा
कौन राम है कौन रहीम
कौन यशु कौन गुरु नानक
कैसे मुझको ये पता चले
जग पूजे क्यों अलग अलग
यहाँ जो बस एक ज्योत जले
एक ही धरती रहने को
रंग लहू का भिन्न नहीं
क्यों बांटा तुमने खुदको
अलग मिला कोई चिन्ह नहीं
जीवन मिला है एक बार
काटेगा वो ही जो बोयेगा
सब है एक सामान यहाँ
जो न माने सब खोयेगा

