मुझे याद नहीं बीती बातें मैं कल के नगमे लिखता हूँ


चिट्ठाजगत अधिकृत कड़ी

दर्दों से रिश्ता है मेरा, गुलशन के कांटे चुनता हूँ
जो जला करेंगे हर दिल में, कागज़ पे शोले रखता हूँ
मुझे याद नहीं बीती बातें मैं कल के नगमे लिखता हूँ

जहाँ बूंदे पीके शबनम की हर रोज़ सुबह आँखें खोले
चाँद भी आ जाए नीचे सुन प्यारी लोरी की बोलें
हर आँगन बस ऐसा ही हो, मैं ऐसे सपने बुनता हूँ
मुझे याद नहीं बीती बातें मैं कल के नगमे लिखता हूँ

किसी दर पे कभी न हो ताले, सब कुछ ही जहाँ में अपना हो
लकीरों से न छलनी  हो धरती पूरा अम्बर न सपना हो
ऐसे सुंदर आलम की मैं तस्वीर सजाता रहता हूँ
मुझे याद नहीं बीती बातें मैं कल के नगमे लिखता हूँ

किसी रोज़ कहीँ न ऐसा हो, हम लौटें आँगन उजड़ा मिले
चलो आज सजाये हर क्यारी, जो कल एक गुलशन बनके खिले
हर ओर जहाँ बिखरी खुशबु, मैं ऐसे घर मैं रहता हूँ
मुझे याद नहीं बीती बातें मैं कल के नगमे लिखता हूँ

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