कब राम आए


चिट्ठाजगत अधिकृत कड़ी

भरत मात संग और सब नर नारी
सरयू तट पे लगी भीड़ भारी
दीयों जैसे रोशन, तन भी थे मन भी
सबको लगे जैसे अब राम आए
हर दिशा में पल पल नज़र ढूँढती थी
सबको बेचेनी की कब राम आए

पुष्पक पे पहुंचे तब जन्म भूमि
हर मुख बोला लो राम आए
अयोध्या नगरी को करने पावन
लंका विजय कर श्री राम आए

कोई पा झलक ही खुश हो रहा था
कोई अश्रुओं से हरी चरण धो रहा था
थी दीप्तिमान हर पथ हर डगरिया
सोने सी चमके अयोध्या नगरिया
दीपों की अवली से थी रोशन दिशाएं
दीपावली थी पहली, वो जब राम आए
मुझसे ना पूछो क्यों फीकी ये दीवाली
कंचन हो मन जो, तब राम आए

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