मेरे जनाजे पे खूब रोये मेरे रोने वाले

मेरे जनाजे पे खूब रोये मेरे रोने वाले
नज़ारा देखके मैं भी गमगीन था
पूछा खुदा ने तब हंसकर मुझसे
क्या ख़ुद न रुक्सत होगे तेरे रोने वाले
दो आंसू गिराए और रब को याद किया
मुझे लगा चलो मरने का सिला मिला
कुछ लोग तो इस चक्र को जानेगे
ख़ुद को अब थोड़ा कम खुदा मानेगे
वो निकले मेरी चौघट से, मैं फिर बड़ा हो गया
इंसान जो भीतर जागा था, फिर कहीं सो गया
तू क्या जाने, पाके क्या खोया तूने खोने वाले
मेरे जनाजे पे खूब रोये मेरे रोने वाले