जो गौरव तू भूल चूका , वो याद दिलाने आया हूँ


चिट्ठाजगत अधिकृत कड़ी

आजाद हिंद के सुप्त ह्रदय , मैं तुझे जगाने आया हूँ
जो गौरव तू भूल चूका , वो याद दिलाने आया हूँ

हँसी जो तू छलकता है, वो बस सपनो में आती थी
आजादी का कोई नाम जो ले, तो खाल खींच ली जाती थी
वंदेमातरम कहने का मतलब समझाने आया हूँ
जो गौरव तू भूल चूका , वो याद दिलाने आया हूँ

बलिदानों की उस अग्नि में, घ्र्त बनके जब लहू जला
दमका उससे आलम ऐसा, एक साथ ये देश चला
जलियां वाले बाग़ का मैं, इतिहास सुनाने आया हूँ
जो गौरव तू भूल चूका , वो याद दिलाने आया हूँ

जब तेवर तेज दिखाने थे, तो वीर भगत सा पूत मिला
शान्ति का पाठ पढ़ाने को,  जिसे गाँधी सा दूत मिला
सूत सुभाष और लक्ष्मी सुता, उस माँ से मिलवाने आया हूँ
जो गौरव तू भूल चूका , वो याद दिलाने आया हूँ

आजादी न हमें मुफ्त मिली,  कई राखी चूड़ी टूटी थी
हर फूल जला शोला बनके, कलियों से अग्नि फूटी थी
क्या खोके पाया ये खुला गगन, मैं मोल बताने आया हूँ
जो गौरव तू भूल चूका , वो याद दिलाने आया हूँ

Explore posts in the same categories: General

Comment:

You must be logged in to post a comment.