नज़रों से तेरी जो दूर हुए


चिट्ठाजगत

नज़रों से तेरी जो दूर हुए
हमें कहीं न पनाह मिली
अपनी सूरत भी भूल गए
तुझसे बिछडे तो ये सजा मिली

आँचल से परे जाते भी कहाँ
छुपने की न कोई जगह मिली
यादों ने तेरी मरने न दिया
जीने की यही एक वजह मिली

पलकों से तेरी जो बूँद गिरी
हर ओर से दिल में आके मिली
मेरी शाम जो तनहा होने लगी
तेरी खुशबु उसमे जाके मिली

फिर थामा तुने हाथ मेरा
जीवन लगे ख्वाबों जैसी गली
फिर खिला प्यार का फूल यहाँ
चाहत की मस्त जो हवा चली

अब कोई तमन्ना दिल में नहीं
हर सपने की ताबीर हो तुम
बांधे एक कच्चे धागे से मुझे
प्यार की एक ज़ंजीर हो तुम
तुझसे चलके तुझ में ही मिले
तू  संग मेरे हर पहर चली
खुदसे दूर न करना कभी
टूटे न कभी चाहत की कली

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