एक कविता भी लिखी जायेगी


चिट्ठाजगत

किसी का था जो दर्द कभी, किसी की वो दवा बना
आंसू जो उतरा पन्नो पे, फिर लबों पे वो दुआ बना
वो रंग सुर्ख स्याही का, कोई मेरी दिल की आग हैं
जले है लाख पन्ने भी, लिखा जो दिल का हाल हैं

लब जो बात न कह सके, बेखौफ कलम कह गयी
दुनिया की तंग गलियों में, वो गंगा बनके बह गयी
खुशबु मेरे इरादों की, उड़ आसमां तक जायेगी
तपी हुई धरा को वो, बरखा बनकर सहलाएगी

चर्चे होंगे जब मेरे, कई पैमाने मुझको तोलेंगे
मैं रहूँगा कब्र में, मेरे बोल खुल के बोलेंगे
ज़िन्दगी को कैद मैं, कुछ पन्नो में कर जाऊंगा
दिलों में मर सकता नहीं, कहने को मर जाऊंगा

ज़िन्दगी की मदिरा भी, यहाँ मौत की एक चाल हैं
मर के भी जीयूँगा मैं, ये लब्जों का कमाल हैं
कोई मुझको जीयेगा फिर, मेरी बात को दोहराएगा
मुझे ज़िन्दगी के बाद भी, एक ज़िन्दगी दे जायेगा

ये हर युग का किस्सा है, ये रीत बदल न पायेगी
एक दिल जो टूटेगा कहीं, एक कविता भी लिखी जायेगी

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