पन्नो में घुल गयी, यूँ सारी ज़िन्दगी

वो लब्जों से आशिकी, वो कलमो से दोस्ती
पन्नो में घुल गयी, यूँ सारी ज़िन्दगी
गम था वो कोई, या ख़ुशी का झोंका
अरमानो की लहर को, पन्नो पे लाके रोका
वो खुदाई थी तेरी, या मेरी बंदगी
पन्नो में घुल गयी, यूँ सारी ज़िन्दगी
वो हंस के मेरा कहना, ख़ामोशी से तेरा सुनना
लब्जों की करवटों पे, सपनो के महल बुनना
वो प्यार ही थे मेरा, ना कहना दिल्लगी
पन्नो में घुल गयी, यूँ सारी ज़िन्दगी