तुझ में कुछ बात तो होगी
हर रोज़ तेरे दर पे शमा जलती हैं
तुझ में कुछ बात तो होगी
तेरे ख्याल से गम की शाम ढलती हैं
तुझ में कुछ बात तो होगी
क्यों झुकता है सर बरबस तेरे आगे
क्यों हर बार मैं बेनकाब होता हूँ
तेरा एहसास जगाये जीने का जूनून
तुझ में कुछ बात तो होगी
तेरे ज़िक्र में रूह पाती है सुकून
तुझ में कुछ बात तो होगी
गुल खुशबु तू, गुलशन भी तू
पतझड़ भी तू, सावन भी तू
मौत की काली चादर अगर
किल्कारिओं भरा जीवन भी तू
माँ तेरा नाम ले पीठ थपथपाए
तुझ में कुछ बात तो होगी
तू छुए तो गुड प्रसाद बन जाये
तुझ में कुछ बात तो होगी
तेरे माटी के टुकड़े देख
यहाँ दिन रात रोते हैं
दौड़ते बटोरने खुशियाँ
रूह का चैन खोते हैं
फिर हो बेउम्मीद, आते तेरी चौघट
तुझ में कुछ बात तो होगी
हर बिगड़ी तेरे दर पे जाती है पलट
तुझ में कुछ बात तो होगी
